संसदीय लोकतांत्रिक प्रणाली में सत्ता तो पांच साल बाद बदल जाती है। कई बार परिवर्तन उससे कम समय में होता है, पर ऐसे परिवर्तनों में अकसर चेहरे ही बदलते हैं, सत्ता की चाल या चरित्र नहीं, व्यवस्था भी नहीं बदल पाती।