अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की ओर से द्वारका-शारदा एवं ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य रहे स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को मरणोपरांत भारत रत्न देने के लिए आवाज उठाई गई।