भगवान शिव का एक नाम आशुतोष भी है जो शीघ्र अति शीघ्र प्रसन्न होने वाले हैं - साध्वी अणिमा भारती जी

जालंधर :-  दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से शिवबाड़ी मंदिर में तीन दिवसीय शिव कथा का आयोजन किया गया ।जिसकी तृतीय एवं अंतिम अस्थाईका में  श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य साध्वी अणिमा भारती जी ने श्रद्धालुओं को शिव महिमा को श्रवण करवाया। जिसमें उन्होंने कहा कि भगवान शिव को अनेका अनेक नामों से जाना जाता है । प्रत्येक नाम के पीछे कोई ना कोई आध्यात्मिक रहस्य है ,जैसे भगवान शिव को त्रिनेत्र धारी भी कहा जाता है।

 महाकाल भी कहा गया है भाव जिसने काल को वश में किया हुआ है, जो देवों के देव महादेव भी कहलाए ।
भगवान शिव का एक नाम आशुतोष भी है जो शीघ्र अति शीघ्र प्रसन्न होने वाले हैं क्योंकि देवताओं पर चाहे संकट आए, मानवो पर या असुरों पर भगवान भोलेनाथ थोड़ी सी भक्ति करने पर ही इन सब के संकट से दूर कर देते हैं ।
इसलिए तो कहते हैं कि जो सुख और कल्याण के मुख स्त्रोत हैं वह भगवान शिव हैं। क्योंकि शिव शब्द का भाव ही है कल्याणकारी। लेकिन साध्वी जी ने कहा कि भगवान शिव को अगर हम जाना चाहते हैं तो हमें एक तत्वदर्शी गुरु की शरण में जाना पड़ेगा जैसे मां पार्वती जी  के जीवन में शिव रूपी गुरु  का आगमन होता है तभी वह  शिव के वास्तविक रूप प्रकाश से परिचित हो पाती हैं और उस ईश्वर को मात्र दिव्य चक्षु से ही देखा जा सकता है।

 
जैसे भगवान शिव के मध्य में तीसरा नेत्र है जिसे तृत्य नेत्र भी कहा जाता है और जब गुरु की कृपा से यह नेत्र खुलता है तब मानव घट में ज्योति का दर्शन होता है। अंत में साध्वी बहनों द्वारा सुमधुर चौपाइयां एवं भजनों का गायन किया गया।