गुरु पूजा आन्तरिक जाग्रति व एक आध्यात्मिक संदेश लाती है। इसकी एक ही गूंज है- उठो, जागो और साधना करो। ऐसी साधना करो कि तुम्हारा लक्ष्य परमात्मा खुद तुम्हारे सामने आ जाए और आकर तुम्हारा वरण करे।

जालंधर:-(13-07-2022) दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, नूरमहल द्वारा आयोजित वर्ष का मुकुटमुणि दिवस श्री गुरुपूर्णिमा महोत्सव इसी परिभाषा को पूरी तरह सत्य सिद्घ करता है।श्री आशुतोष महाराज जी की असीम प्ररेणा व कृपाहस्त तले गुरुपूर्णिमा का पर्व 13 जुलाई 2022 को स्वर्णिम श्रृंखला की एक कड़ी बनकर विशालस्तरीय एवं भव्य आगमन के साथ पूर्ण हर्षोल्लास से मनाया गया। आयोजन के तहत नूरमहल आश्रम के चप्पे-चप्पे पर लाखों की तदाद में आई हुई संगत एवं श्रदालुगणों के स्वागत के लिए शुभकामनाओं के साथ सेवादार तैनात थे। सकल आश्रम का भारतीय कलाकृतियों के साथ साज-शंगार किया गया। 

दीपावली के दिन हम मिट्टी के दीये जलाते हैं लेकिन आज उनका दिन है, जिन्होंने हमारे अंत:करण को दिव्य दीपावली से जगमगा दिया। होली के दिन तो हम कच्चे रंग लगाते हैं लेकिन आज उनका दिन है जिन्होंने हमारे तन, मन और संपूर्ण जीवन को भक्ति के मजीठ रंग में रंग दिया - स्वामी गुरुकिरपानंद जी

इसी गरिमाशाली परिवेश के बीच भारतीय संस्कृति के अंतर्गत गुरूपूर्णिमा का शुभारंभ रुद्री पाठ के साथ किया। वेद मंत्रों के मंगल गान से संपूर्ण वातावरण शुभ्र तरंगों के साथ अभिमंत्रित हो गया। इसी शुभ्रता के बीच क्रेन्द्रबिन्दु ऋषि या गुरु के श्री चरणों में नमन अर्पित करते हुए गुरू महाराज जी की पावन आरती की गई। कार्यक्रम की अभिव्यक्ति में स्वामी चिन्मयानंद जी ने बताया कि आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरू पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाता है। युगों पूर्व आज के दिन ही वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। इसलिए उनके शिष्यों ने उनके जन्मदिवस को ही गुरू पूजा के लिए चुना। जिस कारण इसे व्यास-पूर्णिमा भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि गुरु शिष्य के जीवन में उसका सर्वस्व होते हैं। इसलिए एक शिष्य अपने भगवान से पहले अपने गुरु की पूजा करता है। साध्वी मनसविनी भारती जी ने बताया कि आज के दिन भक्तों के हृदय में बहुत ही उत्साह व उमंग होती है,योंकि आज के दिन सभी शुभ दिवसों और पर्वों का केसर एक साथ बरसता है। 
जन्म के समय तो एक जीवन मिला था, लेकिन आज उनका दिन है, जिन्होंने जन्म को पूर्णता दी है - साध्वी मनसविनी भारती जी 

सत्संग समागम के दौरान स्वामी गुरुकिरपानंद जी ने बताया कि दीपावली के दिन हम मिट्टी के दीये जलाते हैं लेकिन आज उनका दिन है, जिन्होंने हमारे अंत:करण को दिव्य दीपावली से जगमगा दिया। होली के दिन तो हम कच्चे रंग लगाते हैं लेकिन आज उनका दिन है जिन्होंने हमारे तन, मन और संपूर्ण जीवन को भक्ति के मजीठ रंग में रंग दिया। आगे साधवी वैष्णवी भारती जी ने बताया कि हम कितने सौभाग्यशाली हैं कि उस आलौकिक मार्ग पर चल रहे हैं जो आने वाले इतिहास की भूमिका तैयार कर रहा है। दिव्य गुरु का लक्ष्य तो अपने आप मे ही पूर्ण होता है, परन्तु इस लक्ष्य का भागीदार बनने के लिए उन्होंने हमारा चुनाव किया है।

आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरू पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाता है। युगों पूर्व आज के दिन ही वेदव्यास जी का जन्म हुआ था - स्वामी चिन्मयानंद जी

इसलिए हमें स्वयं को संभालकर निरंतर इस मार्ग पर आगे बढऩा है। इसी के साथ ही महाराज श्री के संगीतकार एवं वादक शिष्यों के भावमयी एवं उत्साहवर्धक भजनों से सम्पूर्ण पंडाल जय श्री राम, जय गुरुदेव के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। आध्यात्मिक सुरभि से महकते कार्यक्रम में निम्नलिखित विशिष्ट अतिथियों ने भी शिरकत की प्रमोद जी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ उत्तरी क्षेत्र समरसता प्रमुख, डा. रवजोत, विधायक, सुरिंदर पाल सिंह मेयर होशियारपुर, डा. सिकंदर राज्यसभा सांसद हि. प्र. राजेश बाघा भाजपा उपाध्यक्ष, राकेश राठौर उपाध्यक्ष भाजपा पंजाब, जगदीश समराय पार्षद बलराज ठाकुर जिला प्रधान कांग्रेस जालंधर, डा. जसलीन सेठी पार्षद, मनहर अरोड़ा एम. डी सेंट सोल्जर ग्रुप्स ऑफ इंस्टीट्यूशंस, स. बलविंदर सिंह धालीवाल विधायक,नरेश कटारिया विधायक,पदमश्री, अर्जुना अवॉर्डी करतार सिंह पहलवान