मनुष्य के जीवन में गुरु का महत्व सर्वश्रेष्ठ होता है गुरु और शिष्य का नाता बहुत ही गहरा होता है


जालंधर:(  P.S. DUGGAL ) :- दिव्य ज्योति  जाग्रति  संस्थान की ओर से बिधिपुर आश्रम में सप्ताहिक सत्संग कार्यक्रम का आयोजन करवाया गया इस अवसर पर पूजनीय श्री आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी आणिमा भारती जी ने अपने प्रवचनों के माध्यम से संगत को जागृत करते हुए कहा कि आज हमें अपने जीवन के उद्देश्य को जानकर अपना एवं समाज का सुंदर निर्माण करना है ।


साध्वी जी ने बताया कि कि मनुष्य के जीवन में गुरु का महत्व सर्वश्रेष्ठ होता है गुरु और शिष्य का नाता बहुत ही गहरा होता है हमारे सभी धार्मिक ग्रंथों में वर्णन किया गया है कि यदि जीवन में व्यक्ति धन_ दौलत है ,मान _सम्मान, यश ,कीर्ति इत्यादि की संसार में उपलब्ध हो भी जाए लेकिन फिर भी यह सब गुरु की प्राप्ति ने के बिना अधूरा है। जैसे वृक्ष की जड़ धरती में होती हैं, यदि वृक्ष की जड़ें अपनी आधार मिट्टी से जुड़ी है तो वह वृक्ष हरा भरा रहेगा ,उस पर फल फूल फलीभूत होंगे परंतु यदि वृक्ष अपने आधार से टूट जाए तो वृक्ष सूख जाता है।

इसी प्रकार एक शिष्य के जीवन का आधार उसका गुरु होता है। गुरु के बिना शिष्य का जीवन नीरस है ।मछली के जीवन का आधार जल ही होता है इसलिए भक्तों का कथन है कि यदि शिष्य के ह्रदय में गुरु प्रेम है तो वह जीवित है, यदि नहीं है तो चलना फिरना भी मृतक के समान है ।उसके साथ ही गुरु महाराज जी के शिष्य साध्वी आणिमा भारती जी ने सभी संगत को समझाते हुए कहा कि संसार में केवल मात्र गुरु ही है जो जानता है कि मेरा शिष्य का कल्याण कहां है। इंसान इस बात का साक्षी है कि इतिहास में जिन गुरु भक्तों या सेवकों ने गुरु की आज्ञा को धारण किया  उनकी ही उदाहरणों को आज जीवन के दिशा निर्देश के लिए अपनाया जाता है।
इस अवसर पर साध्वी जी ने बताया कि शिष्या गुरु से आध्यात्मिक  विद्या को प्राप्त करना चाहता है तो इसके लिए एक शर्त को पूर्ण करना आवश्यक है। शिष्य गुरु के चरणों में अपना पूर्ण समर्पण करें गुरु के पावन चरणों में समर्पण के दौरान ही शिष्य गुरु की असीम अनंत कृपा को प्राप्त कर सकता है ।अंत में साध्वी रीता भारती जी ने सा मधुर भजनों का गायन किया।