दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से बिधिपुर आश्रम में भव्य स्तर पर सत्संग भंडारे का आयोजन किया गया।



श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी आणिमा भारती जी द्वारा सत्संग प्रवचन किए गए। इस मौके पर साध्वी बहनों द्वारा सुमधुर भजनों का गायन भी किया गया।

जालंधर :- साध्वी जी ने बताया कि आज जहां सच्चाई का स्थान अवैधता, उद्दण्डता या अराजकता ने ले लिया हो, ईमानदारी, नैतिकता का पालन करने वाले लोगों को कुटिल और धोखेबाजों के साथ निर्वाह करना पड़ रहा हो, तो ऐसे में दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। और यह तभी संभव होता है जब हम अपने जीवन में अध्यात्म को आत्मसात कर लेते हैं। अध्यात्मा हमारे नकारात्मक विचारों को सकारात्मक बनाने का साधन है।



अध्यात्म से व्यक्ति के कर्मों में कुशलता आती है। सांसारिक जिम्मेदारियां दिव्य कर्मों में बदल जाती हैं। जीवन में आध्यात्मिकता का सूत्रपात करने का उत्तम तरीका 'ब्रह्मज्ञान' की ध्यान साधना है। केवल ब्रह्मज्ञान की प्रदीप्त अग्नि ही व्यक्ति के हर पहलू को प्रकाशित कर सकती है। उसे सही राह दिखा सकती है। यही संदेश दीपावली का पर्व भी देता है। हम सभी जानते हैं कि अमावस्या की अंधेरी रात को हर्षोल्लास से भरा दीपावली उत्सव मनाया जाता है। क्योंकि इसी दिन प्रभु श्रीराम आसुरी शक्तियों का वध करके अयोध्या लौटे थे। इसका संकेतिक अर्थ यही है कि जीवन की दुख भरी काली रात्रि में जब ईश्वर रूपी राम का पदार्पण हो जाता है, तो जीवन उत्सवमय हो जाता है।



जब एक साधक सद्गुरु की कृपा से ब्रह्मज्ञान प्राप्त करता है, तो उसके भीतर ईश्वरीय प्रकाश का प्रकटीकरण होता है। ईश्वर के अलौकिक प्रकाश का दर्शन कर उसके दुख रुपी सघन अंधकार का अंत होता है। अतः वह अथाह आनंद का अनुभव करता है। यह ईश्वरीय प्रकाश पग-पग पर मानव का प्रदर्शन करता है। उसे बुराई से बचाता है। इसलिए आज हमें आवश्यकता है ऐसे सतगुरु की जो हमें 'ब्रह्मज्ञान' प्रदान कर ईश्वर के अलौकिक प्रकाश से जोड़ दे।