को समर्पित विशेष सैशन


मुख्यमंत्री द्वारा श्री गुरु तेग़ बहादुर साहब जी की विचारधारा का विश्व-व्यापी प्रसार करने की ज़रूरत पर जोर

महान गुरू साहिबान और शहीदों के नि:स्वार्थ बलिदानों से भरा पंजाब का इतिहास हमेशा ही प्रेरणा का स्रोत रहा : राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित

गुरू साहिब ने मुग़ल शासक के आगे सिर झुकाने की बजाय धार्मिक आज़ादी की रक्षा के लिए शहादत का रास्ता चुना : जस्टिस खेहर

गुरू साहिब जी का लामिसाल बलिदान लोगों को प्यार, सदभावना और सहनशीलता के संदेश को अपनाने के लिए सदा प्रेरित करता रहेगा : राणा के. पी. सिंह

चंडीगढ़, 3 सितम्बर:-पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने शुक्रवार को यह बात ज़ोर देकर कही की नौवें सिख गुरू श्री गुरु तेग़ बहादुर साहिब की विचारधारा को दुनिया भर में प्रचारित किये जाने की ज़रूरत है जिससे शान्ति, भाईचारक सांझ, धर्म निरपेक्षता और मिलजुल कर रहने जैसे मूल्यों की रक्षा हो सके जिनके लिए गुरू साहिब ने अतुल्य बलिदान दिया।

पंजाब विधान सभा द्वारा श्री गुरु तेग़ बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व को मनाने के लिए बुलाऐ गए विशेष सैशन को संबोधन करते हुए मुख्यमंत्री ने जि़क्र किया कि सिख धर्म की विशेषता यह है कि इसमें हमारे गुरू साहिबान द्वारा हमें असूलों और सत्य के रास्ते पर चलने जैसे मूल्यों की रक्षा करने की परंपरा है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि श्री गुरु तेग़ बहादुर जी का जीवन और संदेश उस भावना का आधार हैं जिसको हम पंजाबियत कहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसमें हमारी सांझी तहज़ीब, हमारी मातृभाषा पंजाबी, लोगों, धर्मों, जातियों और संप्रदायों से ऊपर उठती एकसुरता और भाईचारे की गहरी जड़े शामिल हैं। जब हम पंजाब और पंजाबियों की बात करते हैं, तो इसके बाद पंजाबियत का जि़क्र आना लाजि़मी तौर पर बनता है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आगे कहा, ’’हमारे महान गुरू साहिब के जीवन और शिक्षाओं में दृश्यमान होती इस पंजाबियत को समझे जाने और सराहना करके इसको संभाले जाने की ज़रूरत है।’’

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पंजाबियत की इस भावना को हमारे लोगों ने दुनिया के सभी कोनों तक पहुँचा दिया है जहाँ उन्होंने अपनी सख़्त मेहनत, लगन और बलिदान के कारण एक पृथक स्थान हासिल किया है। उन्होंने आगे कहा, ’’पंजाबियत को अक्सर ही ऐसी ताकतों ने चुनौती दी है जो कि हमारे गुरू साहिबान द्वारा हम सबको साथ लेकर चलने के व्यापक विरासत की जगह संकुचित और छोटी सोच वाली विचारधारा की प्रतिनिधित्व करती हैं। इसलिए लोगों के प्रतिनिधि होने के नाते हमारी यह जि़म्मेदारी बनती है कि लोगों को ऐसी ताकतों के खि़लाफ़ सचेत करें और हमारे राजनैतिक हितों को कभी भी पंजाबियत की इस मज़बूत नींव में दरार पडऩे की इजाज़त न दें।’’

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नौवीं बादशाही के 400वें प्रकाश पर्व के मौके पर हमें लोगों के योग्य नेता और प्रतिनिधि होने के नाते उनको सही रास्ता दिखाने की कसम खानी चाहिए। उन्होंने आगे बताया, ’’इस गौरवमई सदन के द्वारा मैं यह यकीन करता हूँ कि हम सांसारिक शान्ति और भाईचारे के संदेश को इस ऐतिहासिक मौके फिर से दृढ़ करें।’’

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इतिहास की तरफ से श्री गुरु तेग़ बहादुर जी को गर्व से ’हिंद दी चादर’ कहा जाता है क्योंकि उन्होंने जबरन धर्म परिवर्तन के विरोध और धार्मिक आज़ादी की रक्षा के लिए बेमिसाल बलिदान दिया। गुरू साहिब ने नवंबर, 1675 में मुग़ल बादशाह औरंगजेब की हकूमत के अंतर्गत कश्मीर के हिंदुओं की धार्मिक आज़ादी की रक्षा हेतु शहादत दी और उनके साथ उनके साथी भाई मतिदास, भाई सतीदास, और भाई दयाल दास जी को भी बेरहमी से कष्ट दिए गए थे।

मुख्यमंत्री ने इस बात का भी जि़क्र किया कि श्री गुरु तेग़ बहादुर जी के सुपुत्र दशमेश पिता श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी ने अपने पिता जी की बलिदान को ’’सीसु दीया पर सिरर न दीया’’ (मैंने अपना शीश तो दिया परन्तु अपना धर्म नहीं छोड़ा)।

गुरू साहिब जी का शीश उनके सेवक भाई जीवन सिंह जिनको भाई जैता जी के तौर पर जाना जाता है, ने गुरु गोबिंद सिंह जी को दिल्ली से श्री आनन्दपुर साहिब लिया कर भेंट किया। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा,’’ आओ इस मौके भाई जैता जी की असाधारण बहादुरी को विशेष तौर पर श्रद्धाँजलि दें। जब भी इस दुखांद घटना की बात चलेगी तो इतिहास उनको याद करेगा।’’

गुरू साहिब जी की बलिदान की सार्थिकता पर रौशनी डालते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका बलिदान आज के समय भी उतना ही सार्थक और अहम है जितना कि आज से साढ़े तीन सदियों पहले था। भारत की अपनी विलक्षण सांस्कृतिक परंपरा है जिसको हम भारतीयता के तौर पर बुलाते हैं जो हमारे मुल्क का संकल्प है। हमारे प्राचीन भारतीय दार्शनिक ग्रंथों में भी ’वसुदेव कुटुंबकम’ के विचार दर्शाते हैं जिससे भाव पूरी दुनिया एक परिवार है। इसी तरह सिख धर्म के बारे मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पास ‘सरबत दा भला ’का संकल्प है जिससे भाव राष्ट्रीय आपदाओं के समय संकटकलीन स्थिति में लोगों को मदद देकर और समूची मानवता का कल्याण करना है। इस धरती के लोगों को अपनी मजऱ्ी का धर्म शांतमयी ढंग से अपनाने के अधिकार की रक्षा के लिए ही गुरू साहिब ने अपनी शहादत दी थी और ऐसा करके गुरू साहिब ने जीवन कुर्बान कर देने के इतिहास में अलग मिसाल कायम की।

मुख्य मंत्री ने भारत के एक बहुलवादी देश के तौर पर कायम रहने के बारे अपनी धारणा सांझा की जहाँ दुनिया के लगभग हरेक धर्म के लोगों का घर होने की विलक्षणता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संकल्प ही भारत को अमीर और सांस्कृतिक विभिन्नता प्रदान करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘एकता में अनेकता ’ के नारे के बारे हम अक्सर बात करते हैं और यह नारा बेमायना या खोखला नहीं है बल्कि इसके गहरे अर्थ हैं जिसको हम सभी की तरफ से समझना और अनुभव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्री गुरु तेग़ बहादुर जी को यही सच्ची श्रद्धाँजलि होगी कि गुरू साहिब जी के प्यार और धार्मिक आज़ादी के सर्वव्यापी संदेश को ग्रहण किया जाये।

इस महान दिवस को मनाने के लिए राज्य सरकार की तरफ से बनाऐ समागमों की रूप-रेखा के बारे बताते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक दिवस को मनाने के लिए राज्य सरकार ने पहले व्यापक प्रबंध किये थे परंतु अप्रैल में कोविड मामलों में वृद्धि के कारण बड़े सार्वजनिक प्रोग्रामों को स्थगित कर दिया। राज्य सरकार की तरफ से श्री आनन्दपुर साहिब और बाबा बकाला में समागम करवाने के इलावा श्री गुरु तेग़ बहादुर जी के जीवन और शिक्षाओं के बारे प्रदर्शनियाँ लगाने और दस्तकारी, पंजाबी साहित्य उत्सव, नाटक (हिंद दी चादर), खेल, मल्टी मीडिया लाईट एंड साउंड शो और सूफ़ी संगीत उत्सव करवाना है, प्रस्तावित थे। उन्होंने उम्मीद अभिव्यक्त की कि जब एक बार कोविड की स्थिति ठीक हो गई तो इनमें से बहुत से समागम करवाए जा सकेंगे।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने श्री गुरु तेग़ बहादुर जी से सम्बन्धित बड़े कस्बों में चल रहे बुनियादी ढांचे और अन्य प्रोजेक्टों का हवाला देते हुये कहा कि नौवें गुरू जी से सम्बन्धित ऐतिहासिक स्थान बाबा बकाला को अपग्रेड करके ग्राम पंचायत से म्युंसपल कस्बा बना दिया गया। श्री आनन्दपुर साहिब के बुनियादी ढांचे में और सुधार लाने के लिए विशेष योजना बनायी गई है। इसी तरह गुरू साहिब जी चरण स्पर्श प्राप्त 103 स्थानों जिनमें 79 गाँव और 24 कस्बे शामिल हैं, की शिनाख़्त की गई है और इनको विकास ग्रांट देने के लिए के लिए प्रति गाँव /कस्बा एक करोड़ रुपए और प्रति गाँव 50 लाख रुपए पहले ही मंज़ूर किये गए हैं। राज्य सरकार की तरफ से तरन तारन में श्री गुरु तेग़ बहादुर स्टेट यूनिवर्सिटी आफ लॉ भी स्थापित की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरू साहिब के 400वें प्रकाश पर्व को मनाने के समागमों के हिस्से के तौर पर कई कदम उठाए गए हैं जिनमें भारत सरकार की तरफ से यादगारी डाक टिकट और राज्य सरकार की तरफ से सोने और चाँदी के सिक्के जारी करने शामिल हैं। इसके इलावा राज्य सरकार की तरफ से बस्सी पठाना की पुरानी जेल जहाँ गुरू साहिब को दिल्ली ले जाते समय कैद रखा था, की संभाल और विकास का काम किया जा रहा है। 6986 गाँवों में प्रकाश पर्व को समर्पित 60 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इससे पहले श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व समागमों के मौके 70 लाख से अधिक पौधे लगाए गए थे। इस तरह दोनों प्रकाश पर्व समागमों मौके राज्य सरकार की तरफ से कुल 1.30 करोड़ पौधे लगाए गए जिससे पंजाब के वातावरण को लम्बे समय के दौरान बहुत फ़ायदा पहुँचेगा। राज्य सरकार ने राज्य में अलग -अलग बुनियादी ढांचों के प्रोजेक्टों के लिए 938.37 करोड़ रुपए की ग्रांट के लिए प्रधानमंत्री को पहले ही माँग पत्र सौंपा है।

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण को समेटते हुए कहा कि वह खुश हैं कि भारत सरकार ने भी इस ऐतिहासिक दिवस को बड़े स्तर पर मनाने का फ़ैसला किया है। उन्होंने अपनी सरकार की वचनबद्धता दोहराते हुए कहा कि महान गुरू की तरफ से दिए गए संदेश को न सिर्फ़ देशभर बल्कि दुनिया के कोने-कोने जहाँ भी गुरू साहिब के श्रद्धालू रहते हैं, तक लेजाया जायेगा क्योंकि गुरू साहिब का संदेश सर्व व्यापक है और इसका बड़े स्तर पर मानवता के बीच प्रसार करना भी बनता है।

इस मौके पर पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने श्री गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी की शहादत को आध्यात्मिक, धार्मिक और भारत के राजनैतिक इतिहास का अहम मोड़ बताया। उन्होंने आगे कहा कि महान आध्यात्मिक गुरूओं में से गुरू साहिब बहुत महान हैं जिनका संदेश मानवता का मार्गदर्शन करता है और हर समय सार्वभौमिक रूप से सार्थक है।

श्री पुरोहित ने कहा, ‘पंजाब का इतिहास महान गुरू साहिबान और शहीदों द्वारा नि:स्वार्थ बलिदानों से भरा है जो हम सभी के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत है। सिख गुरू साहिबान ने हमें उस युग में प्रेरित किया जो शायद हमारे इतिहास का सबसे चुनौतीपूर्ण चरण था। विभिन्न समुदायों के बीच एकता को मज़बूत करने के लिए सिख गुरूओं के महान योगदान और उनके बलिदानों को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। इसी कारण सिख गुरू साहिबान का न सिर्फ़ सिख बल्कि दुनिया भर के सभी धर्मों के लोग सम्मान करते हैं।’

राज्यपाल ने आगे कहा कि गुरू साहिब की शिक्षाओं में से सेवा या निष्काम सेवा भी मूल आधार है। इसको सबसे पवित्र फज़ऱ् माना जाता है जो मानवता को नि:स्वार्थ, विनम्रता और परमात्मा के प्रति आभार के साथ आनन्द प्रदान कर सकती है।

अपने भाषण में विधानसभा के स्पीकर राणा के.पी. सिंह ने कहा कि श्री गुरु तेग़ बहादुर जी ने अपने बेमिसाल बलिदान मानवता को धर्म जाति, रंग-भेद, संप्रदाय और नसलों से ऊपर उठकर प्यार, सदभावना और सहनशीलता के संदेश के प्रति हमेशा प्रेरित करती रहेगी। स्पीकर ने आगे कहा कि गुरू साहिब जी का बेमिसाल बलिदान कश्मीरी पंडितों या हिंदु धर्म की रक्षा के लिए ही नहीं बल्कि समूची मानवता के लिए धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के लिए था।

स्पीकर ने कहा, "जो राज्य, देश, कौम और लोग अपने इतिहास से प्रेरणा लेकर चलते हैं, जो शहादतों से प्रेरित होकर आगे बढ़ते हैं, वह अंधकार में भी प्रकाश ढूँढ लेते हैं। मैं नौवीं पातशाही के दिव्य प्रकाश को कोटी-कोटी नमन करता हूं और समुची मानवता को गुरू तेग़ बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व के अवसर पर हार्दिक बधाई देता हूं।"

अपने कुंजीवत भाषण में भारत के पूर्व चीफ़ जस्टिस जे.एस. खेहर ने दुनिया भर में सिख जीवनशैली में ‘अरदास’ की महत्ता को दिर्शाते हुए कहा कि आज हम सभी भाग्यशाली हैं कि श्री गुरु तेग़ बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व को गुरू साहिब को याद करने के साथ-साथ चिंतन करने के लिए मना रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि गुरू तेग़ बहादुर जी से मार्गदर्शन लेकर हम सभी नौ आध्यात्मिक और सांसारिक स्रोतों को प्राप्त कर सकते हैं और जो लोग गुरू तेग़ बहादुर जी का चिंतन करते हैं उनको हर स्थिति में गुरू साहिब की कृपा प्राप्त होती है।

जस्टिस खेहर ने कहा कि पाँचवे पातशाह श्री गुरु अर्जुन देव जी की शहादत ने सिख इतिहास की दिशा ही बदल दी और सिखों की सैन्यीकरण की प्रक्रिया शुरू की जो उस समय तक एक शांतमयी भाईचारा था। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ़ जस्टिस ने कहा, ’’गुरू तेग़ बहादुर जी के जीवन में घटीं घटनाओं को जानने के लिए इसके पृष्ठभूमि को भी ज़रूर समझना पड़ेगा।’’ गुरू साहिब जी के जीवन और घटनाओं को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय गुरू साहिब उस समय के मुग़ल शासक व अन्यों के आगे झुके नहीं बल्कि इसकी बजाय शहादत का रास्ता चुना जिससे सभी की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा को यकीनी बनाया जा सके।

जस्टिस खेहर ने कहा कि इनसाईक्लोपीडिया ब्रिटानिका में भी श्री गुरु तेग़ बहादुर जी के बलिदान को दूसरे धर्म की धार्मिक स्वतंत्रता की ख़ातिर दी गई शहादत को दर्ज किया गया है।

विरोधी पक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा ने सभी शख्सियतों का धन्यवाद करते हुए कहा कि सभी को श्री गुरु तेग़ बहादुर जी द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर देते हुए कहा कि गुरू साहिब की शिक्षाएं आज के मुश्किल समय में और भी सार्थक हैं जब दुनिया भर में धार्मिक कट्टरता और टकराव बढ़ा हुआ है।

इस मौके पर विधानसभा के स्पीकर ने आदरणीय दलाई लामा और भारत के उप राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू द्वारा भेजा संदेश भी पढ़ा।