इस अवसर पर श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी पल्लवी भारती जी ने बताया कि श्री हमारे गुरु महाराज जी कहा करते हैं  प्रकृति  मां  का हमें शोषण नहीं करना बल्कि उससे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए उसका संरक्षण करना है।वास्तविकता यह है कि प्रकृति और मानव समाज कभी दोनों के बीच गहरी मित्रता हुआ करती थी पर देखते ही देखते इस दोस्ती  ने  भयावह रूप ले लिया मित्रता के नाम पर प्रकृति का शोषण करना शुरू कर दिया। 
हमें यह प्रकृति हमारी ही उपयोग के लिए मिली है हम जितना इसका ख्याल रखेंगे उतनी ही लंबे काल तक यह भी हमारा ख्याल रख पाएगी सदा याद रखें। 
साध्वी जी ने यह भी बताया कि इस करोना काल में प्रकृति ने हमें बहुत कुछ सिखाया है , प्रकृति में अकस्मात घटने वाली  आपदाओं का कारण ईश्वर नहीं बल्कि मनुष्य के विचार और कार्य व्यवहार होते हैं मनुष्य की दूषित सोच और कर्म से वायुमंडल में अच्छी और बुरी तरंगों का संतुलन बिगड़ जाता है तभी प्रकृति विनाशकारी तांडव कर उठती है इसीलिए प्रकृति का संरक्षण अति अनिवार्य है।
इसलिए हर व्यक्ति द्वारा उठाए गए छोटे से कदम से अपने पर्यावरण को बहुत आसान तरीके से बचा सकते हैं।
पर्यावरण के बिना हम यहां जीवन का अनुमान नहीं लगा सकते हैं इसलिए हमें भविष्य में जीवन की संभावना सुनिश्चित करने के लिए अपने पर्यावरण को सुरक्षित और स्वच्छ रखना चाहिए।