शिलाजीत का आयुर्वेद में दो रूप में उपयोग बताया गया है -

कच्चा शिलाजीत जिसमें सिर्फ गन्दगी साफ की हुई रहती है।

शोधित शिलाजीत जिसका शास्त्रों की विधि अनुसार शोधन हुआ है।

कच्चा शिलाजीत कामशक्तिवर्धक है, दूध में घोल कर सेवन करें। शोधित शिलाजीत पित्ताशय की पथरी गलाने की शास्त्रोक्त औषधि है, ताजे जल से सेवन का निर्देश है। आयुर्वेद में तो शोधित शिलाजीत को ही औषधि माना गया है, अन्य बहुत से रोगों में दूसरे द्रव्यों के साथ मिश्रित करके सेवन का निर्देश है। मधुमेह मुख्य है, इसमें चांदी भस्म तथा त्रिबंग भस्म के साथ सेवन। इससे पैंक्रिया एक्टिवेट होने में मदद मिलती है।