दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से श्री गुरु रविदास मंदिर बस्ती 9 जालंधर में श्री गुरु रविदास महाराज जी के 644वें प्रकाश उत्सव के संबंध में एक विशाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें साध्वी सोमप्रभा भारती जी ने संगत को श्री गुरु रविदास महाराज जी के जीवन  काल के अध्यात्मिक रहस्य को उजागर करते हुए कहा कि मध्यकाल में संत कवियों में श्री गुरु रविदास जी परम उच्च आध्यात्मिक और विलक्षण व्यक्तित्व के रूप में प्रसिद्ध हुए श्री गुरु रविदास जी महाराज का जन्म उस समय हुआ जब मनुष्य समाज में चारों और जात पात ऊंच नीच का भेदभाव था।



उस समय के पुरोहित बाहरी आडंबर और कर्मकांड में उलझे हुए थे इनके कारण साधारण लोगों में भी प्रभु भक्ति के संबंध में कई तरह के मतभेद पाए जाने लगे श्री गुरु रविदास जी ने उनके झूठे रीति-रिवाजों का खंडन किया आपने एक अच्छे समाज की स्थापना के लिए ऐसी बुराइयों के विरुद्ध कदम उठाए आपने परमात्मा के प्रकाश स्वरूप को उजागर कर सुंदर वाणी की रचना की आपकी वाणी से लोगों के भीतर मनोबल बड़ा
यही कारण था कि उस समय अलौकिक जीवन और उत्तम व्यक्तित्व को आगे उस समय राजे महाराजाओं को झुकना पड़ा उन्होंने अपने जीवन को एक उदाहरण रूप में उजागर करते हुए ही प्रेरणा दी की महापुरुष दया और त्याग की मूर्ति होते हैं और उनका जीवन सिर्फ परमार्थ की असल परिभाषा को ही सार्थक करता है श्री गुरु रविदास जी महाराज की वाणी प्रेम के उत्तम स्तर को उजागर करते हुए जीव आत्मा को प्रभु रंग में प्रेम की जाने की प्रेरणा देती है अंत में इस अवसर पर साध्वी पल्लवी भारती साध्वी रजनी भारती साध्वी रणे भारती जी द्वारा श्री गुरु रविदास महाराज जी की महिमा में सुंदर भजनों का गायन किया गया जिसमें प्रभु भक्तों ने खूब आनंद माना