नाम : स्वामी ज्ञानानंद

जन्म दि : 5 दिसंबर 1896
ठिकाण : गोरगानुमूदी
पिता : राम राजू
व्यावसाय : योगी, परमाणू भौतिकी विद
मर गए : 21 सितंबर 1969

प्रांरभिक जीवन :


        स्वामी ज्ञानानंद का जन्म 5 दिसंबर 1896 को हुवा था | उनका जन्म आंध्रप्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले के गोरगानुमूदी गांव मे हुवा था | प्राथमीक शिक्षा के बाद उन्हेांने टेलर हाई स्कूल, नरसापूरम मे दाखिला लिया था | उनके पिता राम राजू वैदिक मे रुचि रखते थे | और विव्दानों का पीछा करने थे |

        पूस्ताकों और शास्त्रको के उनक बडे संग्रह ने उनके बेटे को कम उम्र मे ही उनका अध्यायन करने काअवसर दिय था | स्वामी ज्ञानानंद का विवाह उनके पिता ने 1916 मे कर दिया था | लेकिनन गौतम बुध्दा के जीवन से प्रेरित होकर उनहेांने सांसारिक सूखो का त्याग कर दिया था | और नेपाल मे लुम्बिनी चले गए थे | उन्हेांने लगभग 10 वर्षे तक भारत के कई तीर्थस्थलो कि यात्रा कि थी |

        उन्हेोने लगभग 10 साल हिमालय मे बीताए थे | और योग का अभ्यास किया था | और वैदिक साहित्या का अध्यायन किया था | ज्ञानानंद भौतिक मे रुची लेकर जर्मनी चल गए थे | जहॉ उन्हें ड्रेसडेन मे गणित और भौतिकी का अध्यायन किया था | उन्हेोन चालर्स विश्वाविदयालय प्राग मे उच्चा तनाव और एक्स रे भौतिकी मे अनुसंधान किया था |

        उनके स्वामी पुर्णानंद व्दारा उन्हे स्वामी ज्ञानानंद के रुप मे नामांकित किया गया था | 1927 मे जर्मनी मे धार्मिक प्रवचन देने और अपने धार्मिक कार्ये को मुद्रीत करने के लिए गए थे | उनके व्याख्यान ने ड्रेसउेन विश्वाविदयालय मे डम्बर का ध्यान आकर्षित किया था |

कार्य :


        स्वामी ज्ञानानंद एक भारतीय योगी और परमाणू भौतिकि विद थे | 1929 मे दो साल मे स्त्रातक सफलतापूर्वक पूरा किया था | उन्हेांने योग मे विभिन्ना विषयों पर 150 से अधिक व्याख्यान दिए है | जर्मनी मे दिया गया उनका प्रमूख कार्य, पूर्ण सुत्र इस अविध के दौरान छपा था |

        उनके शोध एक्सा रे स्पेक्ट्रोस्कोपी मे सटीक तरीकों का विकास हुआ है | विश्वाविदयालय के अधिकारियों के प्रयोगशाला का नाम परमाणू अनुसंधान प्रयोगशाला स्वामी ज्ञानानंद प्रयोगशाला रखा था |