महाराष्ट्र में एक छोटे से गांव में परम पूज्य श्री गजानन महाराज रहते थे। जो खारे पानी को भी मीठा बना देते थे, बीमार व्यक्ति को स्वस्थ कर देते थे, गरीब लोगों की झोली खुशियों से भर देते थे, दुखियों के सभी दुख हर लेते थे, और जिन माता पिता को संतान नहीं होती थी उन्हें संतान प्राप्ति का आशीर्वाद भी देते थे। हम बात कर रहे हैं शेगाव के संत श्री गजानन महाराज की। इन को भगवान के स्वरूप में से एक रूप माना जाता है। हालांकि आज गजानन महाराज लोगों के बीच में नहीं हैं परंतु उनके भक्त आज भी उन के चमत्कार को महसूस करते हैं, और मानते हैं कि उनके महाराज गजानन जी उन लोगों के बीच में है। शेगाव के लोग कहते हैं कि गजानन महाराज के छूने मात्र से लोगों के ऐसे भयानक रोग खत्म हो जाते थे जिसका कोई इलाज नहीं था। आज भी उनके आश्रम में लाखों की भीड़ भोजन रूपी प्रसाद के लिए जाती है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग इस प्रसाद को सच्चे मन से ग्रहण करते हैं। उनके भारी से भारी पाप सेकेंडों में खत्म हो जाते हैं। आज हम आपको उनकी कहानी बताएंगे और उनके कुछ ऐसे चमत्कार भी बताएंगे जिसको विश्वास करने के लिए आपको एक बार उस आश्रम में जरूर जाना चाहिए।


संत गजानन महाराज भगवान शिव के अवतार माने जाते है। उनका जनम कब हुआ किसी को ज्ञात नहीं लेकिन ऐसा माना जाता है की फरवरी १८७८ में शेगांव में प्रकट हुए थे।

दासगनु महाराज ने गजानन महाराज पर २१ अध्याय वाली “श्री गजानन महाराज विजय ग्रंथ नामक मराठी किताब भी लिखी है। जिसे हिन्दू पवित्र ग्रंथ के रूप में जानते हैं और रोजाना कई लोग इस ग्रन्थ का पाठ मंदिर में या अपने घरों में करते हैं।

शेगाव के संत गजानन महाराज का इतिहास किसी को ज्ञात नहीं है। लेकिन एक किंवदंती के अनुसार,बंकट लाल अगरवाल जो एक पैसा उधारकर्ता उसने सर्वप्रथम २३,फरवरी १८७८ के दिन गजानन महाराज को बेहोश अवस्था में सड़क पर देखा था। बंकट को जब यह महसूस हुआ की यह एक संत है तो वो उन्हें अपने घर ले गए और महाराज से विनती करते हुए कहा की वो बंकट के साथ ही रहे। किंवदंती के अनुसार उन्होंने अपने जीवनकाल में कई चमत्कार किए जैसे की जानराव देशमुख को एक नया जीवन दिलाना,आग के बिना मिट्टी के पाइप को रौशनी देना,सूखे कुए को पानी से भर देना,गन्ने को अपने हातो से छिद्रण कर गन्ने से रस निकालना और एक कुष्टरोगी का इलाज करना। उनके सम्पूर्ण जीवन में किसीने भी उन्हें हाथ में कोई जपमाला धारण करते हुए किसी खास मंत्र का जप करते हुए नहीं देखा। लेकिन वो ऐसे सर्वोच्च संत है जिनका आशीर्वाद पाना ऐसी हर कोई चाह रखता है।

पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक पैसे Bankat लाल अग्रवाल पहला नाम ऋणदाता एक सड़क पर एक "superconscious राज्य में गजानन महाराज 23 फ़रवरी 1878 पर देखा था। उसे एक संत होने के लिए संवेदन, Bankat उसे घर ले और उससे पूछा कि उसके साथ रहना. महापुरूष का कहना है कि वह अपने जीवनकाल में, वह एक Janrao देशमुख के जीवन पर एक ताजा पट्टा दे, आग के बिना मिट्टी के पाइप प्रकाश व्यवस्था, पानी के साथ एक अच्छी तरह से सूखा भरने, घुमा canes के द्वारा अपने हाथों से गन्ने के रस ड्राइंग के रूप में इस तरह के कई चमत्कार प्रदर्शन और एक औरत का कुष्ठ रोग के इलाज के. वह 8 सितम्बर 1910 पर समाधि ले ली. उसके नाम में एक मंदिर पर बनाया गया है समाधि Shegaon, पर.

गजानन महाराज संस्थान Shivshankarbhau पाटिल का प्रमुख विश्वास का सिर है और अच्छी तरह से अपने प्रशासन और मंदिर के प्रबंधन के लिए भारत में जाना जाता है, bhojan kaksha, इंजीनियरिंग और प्रबंधन कॉलेज, आनंद सागर और कई अन्य परियोजनाओं के विश्वास पर स्थित संस्था द्वारा चलाए श्री गजानन Shegaon संस्थान महाराज अमरावती विश्वविद्यालय से संबद्ध shegaon द्वारा प्रबंधित. इस कॉलेज से इंजीनियरिंग की शिक्षा के लिए सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में से एक है। आनंद सागर परियोजना भी नाममात्र दर पर सभी सुविधाओं के साथ पर्यटकों के लिए 650 एकड़ जमीन पर विश्वास के द्वारा विकसित की है। मंदिर महाराष्ट्र में अपनी साफ, स्वच्छ, साफ और विनम्र और सम्मानजनक गजानन महाराज विश्वास के सेवकों है डब्ल्यूएचओ बस सेवा के लिए वहाँ काम करती है पर्यावरण व्यवहार के लिए प्रसिद्ध है।

शेगांव:एक परिचय

शेगांव महाराष्ट्र राज्य के विदर्भ क्षेत्र के अंतर्गत बुलढाना जिले में स्थित एक क़स्बा है। यहाँ की जनसँख्या लगभग साठ हज़ार है। यहाँ के करीबी हवाई अड्डे नागपुर, अकोला तथा औरंगाबाद हैं। शेगांव पहुँचने के लिए सबसे सुविधाजनक माध्यम ट्रेन ही है, यह सेन्ट्रल रेलवे के मुंबई – भुसावल – नागपुर रूट पर स्थित एक रेलवे स्टेशन है। महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों जैसे मुंबई, नागपुर अकोला, भंडारा, नांदेड, अमरावती, चंद्रपुर, वर्धा, यवतमाल, भुसावल अदि से बस सेवाएँ भी उपलब्ध हैं।

यह क़स्बा मुख्य रूप से श्री गजानन महाराज संस्थान मंदिर के लिए संपूर्ण भारत वर्ष विशेषकर महाराष्ट्र तथा करीबी राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश आदि में प्रसिद्ध है तथा दिन ब दिन आस्था के केंद्र के रूप में अपनी आभा फैला रहा है। यहाँ औसतन 35000 तीर्थ यात्री प्रतिदिन दर्शन के लिए आते हैं।

शेगांव बस स्टैंड से श्री गजानन महाराज संस्थान के लिए संस्थान द्वारा संचालित निशुल्क बसें तथा अन्य साधन जैसे ऑटो रिक्शा, तांगा तथा साईकिल रिक्शा चौबीस घंटे उपलब्ध रहते हैं। यद्यपि शेगांव में ठहरने के लिए सुविधाजनक तथा किफायती होटल एवं धर्मशालाएं बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं तथापि संस्थान द्वारा संचालित सर्व सुविधायुक्त भक्त निवास (भक्त निवास क्रमांक 1 से लेकर 6 तक) यहाँ ठहरने का सबसे उत्तम विकल्प है, ये भक्त निवास मुख्य मंदिर से कुछ कदमों की ही दुरी पर स्थित हैं। उच्च कोटि की स्वच्छता, तथा अत्यंत किफायती दरें इन भक्त निवासों की मुख्य विशेषता है (हर भक्त निवास में सुविधाओं के आधार पर दरें अलग अलग हैं)।