आजकल ज्यादातर लोग घंटों मोबाइल और लैपटॉप के सामने झुके रहते हैं जिस वजह से गर्दन में दर्द की समस्या आम बात हो गई है. अगर वक्त रहते इसका इलाज न कराया जाए तो सर्वाइकल पेन की दिक्कत हो सकती है.


गर्दन में दर्द की समस्या इन दिनों भारत में तेजी से बढ़ रही है और इसका सबसे बड़ा कारण है हमारी कार्य जीवनशैली यानी वर्किंग लाइफस्टाइल. वर्क फ्रॉम होम कल्चर ने तो इस समस्या में और ज्यादा इजाफा किया है. इन दिनों लोग कम्प्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल लेकर झुके रहते हैं और कई-कई बार तो बिना ब्रेक लिए एक ही पोजिशन में घंटों काम करते रहते हैं. इसका आपकी गर्दन पर सबसे अधिक बुरा असर पड़ता है. शरीर का संतुलन और पॉस्चर सही न होने के कारण गर्दन में दर्द (Neck Pain) की समस्या देखने को मिलती है. अगर इसे सामान्य दर्द समझकर आपने इग्नोर किया और समय रहते इलाज नहीं करवाया तो यह समस्या कई और गंभीर बीमारियां का कारण बन सकती है.


इन कारणों से होता है गर्दन में दर्द


1. मांसपेशियों में खिंचाव- पॉस्चर सही न होने (Wrong Posture), बिना पोजिशन चेंज किए लगातार घंटो डेस्क वर्क (Desk Work) करने, सोते वक्त गर्दन की पोजिशन सही न होने या फिर एक्सरसाइज करते वक्त गर्दन में तेज झटका लगने की वजह से गर्दन की मांसपेशियों में तनाव या खिंचाव (Neck Strain) आ जाता है और इसी वजह से तेज दर्द महसूस होने लगता है.

2. किसी तरह की चोट- अगर आप गिर जाते हैं, कार एक्सिडेंट होता है या फिर स्पोर्ट्स के दौरान कोई चोट लगती है तो इस दौरान गर्दन में चोट (Neck Injury) लगने का खतरा सबसे अधिक होता है क्योंकि इस तरह की चोट में गर्दन की मांसपेशियां और लिगामेंट्स सामान्य से अधिक फोर्स के साथ हिल जाती है. सिर में अचानक झटका लगने की वजह से भी गर्दन में दर्द हो सकता है.

3. हार्ट अटैक- आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन गर्दन का दर्द हार्ट अटैक (Heart Attack) का भी एक लक्षण है. हालांकि यह एक मात्र लक्षण नहीं है क्योंकि गर्दन में दर्द के साथ ही आपको सांस लेने में तकलीफ, पसीना आना, जी मिचलाना, उल्टी आना, बाजू या जबड़े में दर्द जैसे लक्षण भी महसूस होंगे. 

4. मेनिनजाइटिसयह ब्रेन से जुड़ी एक बीमारी है जिसमें ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड के आसपास मौजूद टीशूज में इन्फ्लेमेशन (Inflammation) होने लगता है. इस बीमारी से पीड़ित मरीजों को बुखार और सिरदर्द के साथ ही गर्दन में दर्द और जकड़न की भी शिकायत होती है. लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज करने की बजाए तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.

5. अन्य कारण- रुमेटाइड आर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस, फाइब्रोमायल्जिया, स्पॉन्डिलाइसिस, स्पाइनल स्टेनोसिस आदि बीमारियों की वजह से भी गर्दन में दर्द की दिक्कत हो सकती है. 

गर्दन में दर्द से बचने के लिए क्या करें


- अपना पॉस्चर हमेशा सही रखें. बैठने या खड़े रहने के दौरान इस बात का ध्यान रखें कि आपके कंधे आपके हिप्स के ऊपर स्ट्रेट लाइन में हों और आपके कान आपके कंधे के ठीक ऊपर.
- आप चाहे कोई भी काम करें, किसी भी एक पोजिशन में बहुत अधिक समय तक न रहें. अगर सीधे बैठे हैं तो घंटों तक वैसे ही बैठे न रहें, थोड़ा ऊपर, नीचे, दाएं, बाएं हो लें. हर 20-25 मिनट में एक बार अपनी जगह से उठकर गर्दन और कंधे को हिला लें. 

-अपने शरीर का पूरा ध्यान रखें, रोज एक्सरसाइज करें, दौड़ें, लेटें, स्ट्रेचिंग करें, योग करें और वो एक्सरसाइज तो जरूर करें जो आपकी गर्दन के दर्द में आराम दे.

- अपनी डेस्क, कुर्सी और कम्प्यूटर को अपने शरीर के हिसाब से अडजस्ट करें ताकि वह आपके आई लेवल पर रहे और कुर्सी के हैंडल पर अपना हाथ रखें.

- अगर आप स्मोकिंग करते हैं तो इससे भी गर्दन का दर्द विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है इसलिए धूम्रपान की आदत छोड़ें.