वाराणसी-माघी पूर्णिमा पर सीरगोवर्धनपुर में इस वर्ष भी संत रविदास की जयंती का उत्सव मनाया जाएगा, लेकिन इस बार 27 फरवरी को होने वाले मुख्य आयोजन में प्रवासी भारतीय भक्तों का हुजूम नहीं दिखेगा। कनाडा, अमेरिका, आस्ट्रिया, इंग्लैंड, स्पेन, फीजी आदि देशों से कोविड-19 के कारण रविदासिया अनुयायियों का आना सिर्फ नाममात्र का होगा।

काशी में होने वाले रविदासिया धर्म के सबसे बड़े उत्सव के लिए इस वर्ष सिर्फ वही एनआरआई भारत आ रहे हैं, जो या तो रविदास जयंती उत्सव की कमान संभालने वाली कमेटी के सदस्य हैं, अथवा संत रविदास मंदिर चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से जिन्हें गंभीर दायित्व सौंपे गए हैं। इस वर्ष न सिर्फ प्रवासी भारतीय, बल्कि पंजाब के विभिन्न जिलों से आने वाले भक्तों की संख्या में भी कमी देखने को मिलेगी। उन्होंने बताया कि एक तरफ जहां भक्तों के आने की तादाद कम होगी। वहीं दूसरी तरफ गुरुवाणी का पाठ कराने वालों की संख्या पिछले साल की अपेक्षा दोगुनी हो गई है। पिछले साल करीब दो हजार लोगों ने गुरुवाणी का पाठ अपने नाम से कराने के लिए बुकिंग कराई थी। इस वर्ष जयंती महोत्सव आरंभ होने से पहले ही यह संख्या चार हजार के आसपास पहुंच चुकी है। गुरुवाणी के पाठ की बुकिंग कराने वालों में ज्यादातर प्रवासी भारतीय हैं।

तेज गति से बस रही टेंट सिटी सीरगोवर्धनपुर स्थित संत रविदास मदिर के प्रबंधक निर्मल सिंह ने बताया कि टेंट सिटी का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। विशाल टेंट सिटी में दो तरफ से प्रवेश द्वार बनाए जा चुके हैं। साथ ही ज्यादातर टेंट में 60 से 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। जालंधर से आई सेवादारों की दो खेप अपने अपने काM में जुट गई है। कोई दल पानी के कनेक्शन जोड़ने में तल्लीन है तो कोई रास्ते का निर्माण करने में व्यस्त है।