✳️🙏ॐ शान्ति जी✳️


                 जब स्कूल में टीचर एक बच्चे को मारते हैं, तो सारे बच्चे डर कर सहम जाते हैं । जब ऑफिस में ऑफिसर किसी  कर्मचारी को डांट लगाता हैं, तो बाकी कर्मचारी दबा हुआ सा महसूस करते हैं। जिस घर में आये दिन कलह- क्लेश होता हैं, उस घर के बच्चे सदैव दुःखी और निराश रहते हैं। आप ध्यान से देखेंगे की लोग भिन्न भिन्न व्यवहारों में कैसी मुद्रा बना लेते हैं। अगर आप में जिद्दीपन हैं, चिड़चिड़ापन हैं, क्रोधीपन हैं, उतावलापन हैं, व्याकुलता हैं, अशांति हैं, पढने मे मन नहीं लगता है, अनिद्रा हैं, याद नहीं रहता तो सदा अपने आपको मन में पदम आसन पर बैठे हुए योग मुद्रा में देखें। मन में जैसा विचार होगा वैसा हमारा व्यवहार होगा। हमारा मन शरीर के जरिये घूमता रहता हैं। मन के घुमने के साधन हैं आँखें, चेहरा, वाणी और मांसपेशियां। पहले मन मे विचार आता हैं, कुछ ही देर मे आँखों द्वारा प्रकट होता हैं, इसके बाद वही विचार चेहरे पर प्रकट होता हैं, फिर वाणी से प्रकट होता है। अन्त में शारीरिक मांसपेशियां उस विचार के अनुसार कार्य करती हैं।