जालंधर प्रशासन की तरफ से किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करने के लिए किये जा रहे ठोस प्रयासों के फलसवरूप बहुत से किसानों ने पराली जलाने की बजाय इससे पैसे कमाने का ढंग खोज लिया है। डिप्टी कमिश्नर जालंधर ने बताया कि पिछले साल जिले के घास रेक्स समेत सिर्फ 20 बेलर मशीने थी और इस साल सरकार की 50 प्रतिशत सब्सिडी स्कीम अधीन किसानों को 12 अग्य बेलर मशीनें दीं गई है। उन्होंनै बताया कि यह मशीन एक दिन में 20 से 25 एकड़ धान की पराली को बेल देती है ओर एक एकड़ में 25 से 30 क्लिंटल परांली निकलती है। उन्होंनै बताया कि पराली की यह गांठें बिजली उत्पादन प्लांट की तरफ से 135 रुपए प्रति क्लिंटल के हिसाब से खरीदीं जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा इस मशीन को किसानों में लोकप्रिय बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। कंगन गांव के किसान मनदीप सिंह ने बताया कि वह नक्रोदर के गांव ब्रीड़ में स्थापित बिजली उत्पादन यूनिट को लगभग 20,000 क्लिंटल धान की पराली बेच रहा है ओर पराली की गांठें बनाने के बाद 135 रुपए प्रति क्लिंटल के हिसाब के साथ बेच रहे है। उन्होंनै कहा कि धान की कमाई का स्थायी साधन बन गई है ओर उसे देखते हुए इलाको के अन्य किसान भी आगे आए है ओर पराली बेचने के लिए तैयार है।
मुख्य कृषि अधिकारी डा. सुरिन्दर सिंह ने कहा कि किसानों को कटाई वाले खेत में रीपर चलाना पडेगा और बाद में रेक्स वाली एक छोटी सी मशीन बिखरी हुई पराली को कतार में डाल देती हे ओए आखिर में जेलर गांठें बनाना शुरू कर देता है।