भारत में भी बड़ी संख्या में कछुए पाए जाते हैं। ओडिशा का समुद्रतट कछुओं के आवास और उनके प्रजनन के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं। यहां पर विभिन्न प्रजातियों के कछुए पाया जाना सामान्य बात है, लेकिन रविवार को बालासोर में एक अत्यंत दुर्लभ प्रजाति का कछुआ पाया गया। इस कछुए का रंग सामान्य कछुए से बिलकुल अलग है और यह पीले रंग का है।टाउन ऑफ कियावा आइलैंड एससी ने गत रविवार को फेसबुक पर कछुए की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, ‘हम बेहद उत्साहित हैं। जब इसका पता चला तब वहां कई लोग मौजूद थे। इनमें कॉलेज ऑफ चाल्र्सटन के छात्र भी शामिल थे। माना जा रहा है कि कछुआ आनुवंशिक समस्या का शिकार है, जिसे ल्यूसिज्म कहा जाता है। इसके कारण किसी जानवर की त्वचा का रंग हल्का या चित्तीदार हो जाता है। इस पोस्ट को सैकड़ों लाइक्स मिले हैं। बड़ी संख्या में लोगों ने इसे साझा भी किया है।वनों में रहने वाले कछुओं की चार प्रजातियां दक्षिण-पूर्व एशिया में पायी जाती हैं, जिनमें मनोरिया इम्प्रेसा शामिल है। नर कछुए का आकार मादा से छोटा है, जिसकी लंबाई 30 सेंटीमीटर है। मनोरिया वंश के कछुए की इस प्रजाति का आकार एशियाई जंगली कछुओं के आकार का एक-तिहाई है। इससे पहले ओडिशा के बालासोर में पीले रंग का कछुआ देखा गया था। पीले रंग का यह खूबसूरत और दुर्लभ कछुआ ओडिशा में बालासोर के सुजानपुर गांव में पाया गया था। सुजानपुर के रहने वाले बसुदेव महापात्र को यह कछुआ उस वक्त मिला जब वह अपने खेत में काम कर रहे थे। जैसे ही बसुदेव ने उस कछुए को देखा वह उठाकर उसको घर पर ले आए। बाद में उन्होंने उसको वन विभाग के अधिकारियों के सुपूर्द कर दिया था। भारत में कछुए की एक नई और दुर्लभ प्रजाति मिली है जो विलु‍प्‍त होने की कगार पर है। इस खोज के बाद भारत दुनिया में तीसरा सबसे अधिक विविध कछुओं की प्रजाति वाला देश बन गया है।