🌻पतंजलि योगसूत्र🌻 के *विभूतिपाद* नामक खण्ड में समर्थवान,सिद्ध योगियों या गुरुओं के द्वारा *परकाया प्रवेश* का वर्णन हैं । 🙏🏼🙏🏼

एक बार *शंकराचार्य जी* ने अपने शरीर से अपनी *आत्म-चेतना को निकालकर राजा अमरीक के भीतर प्रवेश* कर गए और अब वो राजा पहले से भी अच्छे तरीके से काम करने लगा।राज्य का चहुमुखी विकास होने लगा और राजा एक सन्त की तरह जीवन बतीत करने लग गया था। यह देखकर सभी मंत्रियो को आश्चर्य होता था कि -" *क्या यह वही राजा हैं या कोई और  हैं*?"🤔🤔
लोगों को क्या समझ में आता कि उस शरीर के माध्यम से वास्तव में वो राजा नही,बल्कि एक *सन्त/एक गुरु* काम कर रहे थे और नाम उस राजा का हो रहा था ।😊

अपना विशेष कार्य सम्पन्न होने पर  पूज्य  🙏🏼आदिगुरु शंकराचार्य जी🙏🏼 अपनी आत्म-चेतना को उस शरीर से निकालकर पुन : अपने वास्तविक शरीर में प्रवेश कर गए |यही हैं भारत की दिव्य 🍁परकाया प्रवेश विद्या🍁 जोकि एक *सिद्ध गुरु या योगी* ही जानते हैं।🙏🏼🕉🙏🏼

हो सकता हैं कि वर्तमान समय में भी ऐसे *सिद्ध गुरु* किसी *राजा,मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री* के शरीर में प्रवेश कर *प्रभु की दिव्य योजनाओं* को पूर्ण कर रहे हो !😊